भगवानपुर से विजय भारती की रिपोर्ट
भगवानपुर (बेगूसराय) द्वितीय पुण्य स्मृति दिवस के अवसर पर राजयोगिनी, परम तपस्विनी, परम श्रद्धेया, महान् देवभूति विश्व वंदनीया दादी जानकी जी को जिज्ञासुओं व श्रद्धालुओं ने उन्हें सहृदय स्मरण किया। उक्त अवसर पर तेघड़ा बाजार के मुख्य मार्ग स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के शाखा में आयोजित उनके द्वितीय पुण्य स्मृति दिवस के अवसर पर उक्त शाखा के संचालिका पूज्यनीया बी के आशा दीदी ने दादी जानकी जी के तैल चित्र पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राजयोगिनी दादी जानकी जी वैसे अद्वितीय परम शांत आत्मा थी।

जिन्हें अमेरिका के मनोवैज्ञानिक शोधकर्ताओं ने अपने शोध के उपरांत मोस्ट स्टेबल माइंड लेडी के अवार्ड से नवाजा था। उन्होंने बाबा के भविष्यवाणी को जनजन तक पहुंचाते हुए कहा कि एक कल्प में चार युग सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलयुग होते हैं।अब कलयुग का भी अंत होने वाला है तथा सतयुग आने ही वाला है अर्थात यह संगम युग चल रहा है।

दूनियां की महाविनाश की तैयारी हो गई है।पुरी दुनिया के देशों में विध्वंसक परमाणु आग उगलेंगे, प्राणियों का महाविनाश होगा वहीं ईश्वरीय देश भारत इन युद्धों से पृथक रहेगा, यहां गृह युद्ध होगा, सभी धर्मों के लोग एक दूसरे को अंत कर देने के लिए उतावले रहेंगे।

शांत आत्मा जो परम शांत परमात्मा में लीन रहेगा उसकी रक्षा बाबा करेंगे और उसका वालबांका भी नहीं होगा, फिर से सतयुग का आरंभ होगा, सभी जगह शांति ही शांति होगी, वहीं तेघरा थाना प्रभारी संजय कुमार ने दादी जानकी जी को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि पुण्य तिथि सबकी नहीं मनाई जाती।

जिन्होंने समाज,देश दुनिया को कुछ दिया है अथवा नेक दिल से सेवा और सहयोग किया है उन्हीं की पुण्यतिथि मनाई जाती है।दादी जानकी जी ने दूनिया को शांति का संदेश दिया है। उन्होंने आगे कहा कि आज़ दूनियां में भ्रष्टाचार, अत्याचार अनाचार सीमा पार कर गया जिसके कारण महाविनाश निश्चित है।

उक्त अवसर पर दैनिक अखबार राष्ट्रीय सहारा के ब्यूरो प्रमुख सुमित कुमार सिंह, पत्रकार विजय भारती, शिक्षक सुमित कुमार भारती,रवि कुमार, महेंद्र पोद्दार, राजीव कुमार सहित दर्जनों स्त्री पुरुष जिज्ञासुओं व श्रद्धालुओं ने परम श्रद्धेया राजयोगिनी दादी जानकी जी को पुष्पांजलि अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा अपने आपको को धन्य हुए तत्पश्चात् प्रसाद ग्रहण कर शांति का अनुभव किया।

