सुहागिन महिलाओं ने वटसावित्री व सोमवती अमावस्या के अवसर पर की पुजा अर्चना

दोनों व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति के दीर्घायु होने की कामना से करती है

भगवानपुर संवाददाता विजय भारती

भगवानपुर (बेगूसराय) वटसावित्री व्रत तथा सोमवती अमावस्या को लेकर प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों स्थित पवित्र स्थान में अवस्थित वट वृक्ष तथा पीपल वृक्ष में सुहागिन महिलाओं ने प्रातः काल उठकर पुजा अर्चना की तथा वेर दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार ज्येष्ठ मास के अमावस्या को प्रत्येक वर्ष सुहागिन महिलाएं अपने पति के दीर्घायु होने की कामना से वटसावित्री व्रत रख वटवृक्ष की पुजा अर्चना करती है वहीं इस वर्ष वटसावित्री व्रत सोमवार को होने के कारण सोमवती अमावस्या तथा शनि जयंती भी आज ही होने के साथ साथ आज़ सर्वाथ सिद्धी योग तथा सुकर्मा योग होने के कारण इसका महत्व ज्यादा ही बढ़ गया है।

जानकारों के अनुसार ऐसा संयोग 30 वर्ष बाद बना है। मालूम हो कि आज वटसावित्री के शुभ अवसर पर सुहागिन महिलाएं व्रत रखकर नव वस्त्र सहित सोलह श्रृंगार कर फल फूल, मिष्ठान के साथ माथे पर कलश लेकर बड़गद के वृक्ष के पास जाकर पुजा अर्चना की तथा वृक्ष में कच्चे धागे बांध कर अपने पति के दीर्घायु होने की कामना की। कहा जाता है कि बड़गद के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों महादेव का वास है तथा मार्कंडेय ऋषि को भगवान कृष्ण बड़गद के पत्ते पर ही दर्शन दिए थे।

इसलिए इस दिन उक्त वृक्ष का पूजन से सुहागिन को अखंड सौभाग्य का फ़ल प्राप्त होता है वहीं बड़गद वृक्ष का उम्र ज्यादा होने से उसके उम्र के तरह ही अपने पति के दीर्घायु होने की कामना सुहागिन महिलाएं करती है। संयोग से आज़ ही के दिन सोमवती अमावस्या होने के कारण सुहागिन महिलाएं बड़गद वृक्ष में पुजा के उपरांत पीपल वृक्ष में भी पुजा अर्चना कर पीपल वृक्ष में 108 वार परिक्रमा कर वेर दिया।

इस तरह एक ही व्रत में आज़ सुहागिनों ने दो दो पुण्य लाभ लिए। प्रखंड क्षेत्र के अतरुआ गांव स्थित बाबा गणिनाथ मंदिर में अवस्थित वट वृक्ष में आज़ सुबह से ही सुहागिन महिलाओं का बड़ी संख्या में आना जाना लगा रहा वहीं पास ही अवस्थित ब्रह्म स्थान में अवस्थित पीपल वृक्ष में वेर देने वाली सुहागिन महिलाओं की लंबी कतार देखी गई। इसी तरह प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों में अवस्थित वट वृक्ष में वट सावित्री व्रत रखने वाली सुहागिनों के द्वारा पुजा अर्चना की गई वहीं पीपल वृक्ष में भी वेर देकर पति के दीर्घायु होने की कामना की।