तीन दिवसीय शिव महिमा सह शिव अवतरण महोत्सव का भव्य समापन

समापन के उपरांत झंडोत्तोलन कर नारियल फोड़कर राजयोगिनी कंचन दीदी ने अतरुआ में किया ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवा केन्द्र का शुभारंभ

शरीर एक गाड़ी है आत्मा उसका ड्राइवर__राजयोगिनी कंचन दीदी

भगवानपुर संवाददाता विजय भारती

भक्तों को भक्ति का अहंकार नहीं करना चाहिए__ राजयोगिनी कंचन दीदी

भगवानपुर (बेगूसराय) मैं भगवान का सबसे बड़ा भक्त हूं,यह अहंकार व्यक्ति को भगवान से दूर कर देता है। भक्ति का दिखावा करने से भगवान प्रसन्न नहीं होते बल्कि भगवान को अपने मनमंदिर में जगह देने और हृदय में बसाने से भगवान प्रसन्न होते हैं उक्त उद्गार प्रखंड क्षेत्र के अतरुआ गांव स्थित ब्रह्म स्थान में बी के आशा दीदी द्वारा आयोजित तीन दिवसीय शिव महिमा सह शिव अवतरण महोत्सव के दौरान व्यास पीठ पर विराजमान प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय बेगूसराय सेवा केन्द्र के संचालिका पूज्यनीया राजयोगिनी कंचन दीदी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किया।

उन्होंने उपरोक्त वाणी को एक लघु कथा के माध्यम से समझाते हुए कहा कि एक वार तीनों लोकों का भ्रमण करने वाले नारद मुनि भगवान के दरबार में पहुंचकर भगवान के भक्तों की सुची पर नजर डाली तो भक्तों की सुची में सबसे उपर अपना नाम देखकर उन्हें खुशी का ठिकाना नहीं रहा , उक्त सुची में हनुमतलाल का कहीं नाम नहीं था।वे अहंकार वश दौड़े चले आये हनुमान जी के पास तब हनुमानजी को देखा कि हनुमान जी किसी वृक्ष के नीचे भगवद भजन में लीन थे।नारद जी ने उन्हें बताया कि आप इतना भक्ति करते हैं।

लेकिन आपका नाम भगवान के भक्तों की सुची में नहीं है।भक्त हनुमान ने कहा मैं भक्ति भगवान की सुची में नाम दर्ज कराने के लिए नहीं करता वल्कि उनके हृदय में समाने के लिए करता हूं,तब नारद जी ने कहा कि ये कैसे साबित होगा कि जिसका नाम भक्तों की सुची में नहीं होगा, लेकिन भगवान के हृदय में होगा।तब नारद जी ने अहंकार वश हनुमान जी को भगवान के दरबार में ले गए।

उस समय भगवान अपने प्रिय भक्तों का ध्यान कर रहे थे,तब नारद मुनि ने भगवान से पुछा भगवान आप किन्हें याद कर रहे हैं तब भगवान ने कहा मैं अपने प्रिय भक्त हनुमान को याद कर रहा हूं। यह सुनकर नारदजी शर्मिन्दित हुए।उनका अहंकार टूट गया कि मैं भगवान का सबसे बड़ा भक्त हूं। भक्ति ऐसी होनी चाहिए जिसमें भक्ति का अहंकार न हो। दीदी ने आगे कहा कि देह के भान से निकल कर मैं एक आत्मा हूं ऐसा भाव रखना चाहिए।शरीर तो एक गाड़ी है आत्मा उसका ड्राइवर है।

फिर इस शरीर के रिस्ते का अहंकार क्यों? धन दौलत माल खजाना का गुमान क्यों? मरने के बाद तो सबकुछ यहीं रह जायेंगा , कुछ नहीं जायेगा। जायेगा तो अच्छे बुरे कर्म ही। संसारिक रिस्ते तो शरीर की पीड़ा हर सकते हैं लेकिन मन की पीड़ा तो परम पवित्र पिता परमात्मा ही हर सकते हैं। प्रवचन के उपरांत आरती में उमड़े श्रद्धालुओ की आस्था देख दीदी भावभिभोर हो रहे थे। उसके बाद क्षेत्र में शांति, समृद्धि,सुख बनी रहे।

लोगों में अच्छी भावना का संचार होता रहे इस भावना से प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की शाखा का शुभारंभ झंडोत्तोलन कर तथा नारियल फोड़कर राजयोगिनी कंचन दीदी ने किया। उक्त तीन दिवसीय शिव महिमा सह शिव अवतरण महोत्सव कार्यक्रम के मुख्य आयोजक तेघड़ा सेवा केन्द्र के संचालिका पूज्यनीया बी के आशा दीदी के द्वारा उक्त गांव में इस तरह का पवित्र और सराहनीय कार्य करने के लिए ग्रामीणों ने उनके प्रति आभार जताया।

उक्त अवसर पर प्रखंड प्रमुख इन्द्रजीत कुमार, सांसद प्रतिनिधि रामप्रवेश राय, पंसस यश कुमार उर्फ डिम्पल, पूर्व वार्ड सदस्य बचनदेव राय,निरज घोष, रामाकांत मिश्र, अनिल प्रसाद, शिक्षक सुमित कुमार भारती, बिरेंद्र पंडित, रामप्रकाश साह, जयदेव साह,अमर कुमार,रवि कुमार, पत्रकार विजय भारती सहित बड़ी संख्या में दूर दूर से आए ब्रह्माकुमारी व ब्रह्मा कुमार तथा हजारों श्रद्धालु श्रोता उपस्थित थे।