दंड प्रक्रिया संहिता 156(3) का थानेदार कब तक करेंगे उलंघन, क्यों नहीं होती है ऐसे थानेदार पर जिलें में कार्रवाई।

बेगूसराय :- पुलिस जिस पर जनता का सुरक्षा का पूरी जिम्मेवारी रहतीं है, मगर वही पुलिस अपने कर्तव्य से भागने लगे तब कैसे कोई गरीब को इंसाफ मिलेगा। ये मामला सामने आया है बेगूसराय जिलें के भगवानपुर थाना की जहां एक विधवा महिला को इंसाफ के लिए थाने के दर दर ठोकरें खाने को मिल रहें हैं। बताते चलें कि जब पिड़ित महिला ने इंसाफ के लिए थानेदार को आवेदन दिए तो दबंग थानेदार ने एफआईआर दर्ज करनें से मना कर दिया ।

आखिरकार पिड़ित महिला ने जिलें के माननीय मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी बेगूसराय के शरण में जाकर गुहार लगाई। और एफआईआर दर्ज करवाने में दंड प्रक्रिया संहिता 156 (3) के तहत प्रथम सूचना दर्ज करवाने की निवेदन किए। वहीं भगवानपुर थानाध्यक्ष के द्वारा माननीय न्यायालय के भी आदेश को भी दरकिनार करनें से पीछे नहीं दिख रहें हैं और करीब दस दिन होने को आये एफआईआर दर्ज नहीं हुआ।

बताते चलें कि माननीय न्यायालय में दिए आवेदन में सूचक आरती कुमारी ने बताई कि 6 आरोपी ने जहर देकर उसके पति ललन कुमार की हत्या कर शव को गायब कर दिया। विदित हो कि ये वर्तमान भगवानपुर थानाध्यक्ष मनीष कुमार के द्धारा ऐसा करना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी शेरपुर गांव की महिला ने अपने साथ बालात्कार होने की बातें बताई थीं वहीं दबंग दरोगा के द्धारा एफआईआर दर्ज नहीं किया गया था। सीनियर अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार एफआईआर दर्ज किया गया।

वहीं एस०आई० मनीष कुमार ने इससे पहले भी सिंघौल ओपी में रहते हुए अमरौर पंचायत के बीजेपी पंचायत अध्यक्ष गोपाल के हत्या का नामजद अभियुक्त को ओपी से छोड़ने की बातें सामने आई थी। और आरोपी को छोड़ कर अंतिम प्रपत्र रिपोर्ट में सूत्र हीन बता कर मामला खत्म करने की कोशिश किए। मगर सूत्र बताते हैं कि अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ के कारण कोई जांच नहीं हुआ।

वहीं माननीय न्यायालय में विरोध पत्र अवश्य लगाया गया। बताते चलें कि जिलें के चेरिया वरियारपुर थाना अंतर्गत 71/20 में माननीय न्यायालय के आदेश के बाद एफआईआर दर्ज नहीं करनें पर माननीय उच्च न्यायालय पटना ने सुनवाई करतें हुए थानाध्यक्ष को शो कॉज किया गया था और जबाव लेकर न्यायालय में उपस्थित होने बोला गया।

कहीं ऐसा ना हो इस मामले में पुनः बेगूसराय पुलिस को माननीय उच्च न्यायालय पटना में अपना सफाई देना पड़े। इतना तो अवश्य है दबंग दरोगा की गलती पर बेगूसराय पुलिस पर बड़ा प्रश्नचिह्न अवश्य लगता है, क्या गरीबों को थाना के माध्यम से नहीं मिलती न्याय , कब तक न्याय के उम्मीद में थाने के लगानें होंगे चक्कर। आखिर सच्चाई अवश्य लेट सही मगर इंसाफ अवश्य मिलने की उम्मीद है।

देखना दिलचस्प होगा कि ऐसे अधिकारी से क्राइम कंट्रोल में कितना उम्मीद करतें हैं वरीय अधिकारी और कब तक माननीय न्यायालय के आदेश आने के बाद एफआईआर दर्ज की जाती है कहीं ऐसा तो नहीं आरोपी को बचाने के लिए ऐसा हथकंडे अपनाए जाते हैं ताकि पिड़ित विधवा महिला को इंसाफ नहीं मिलेगा ऐसा आभास हो और इंसाफ के लिए दर दर की ठोकरें खानें के बाद संविधान से विश्वास खत्म हो जाये।

इस मामले में जब पत्रकारों के द्धारा थानाध्यक्ष मनीष कुमार का पक्ष लेना चाहें तो मिडिया के सवालों से भागते हुए दूरभाष पर बात करना भी उचित नहीं समझें और सरकारी नंबर रिसीव भी नहीं किए। सोचनीय सवाल तो अवश्य है जहां पत्रकारों को सवाल के जवाब नहीं दें सकते हैं। ऐसे महान एस०आई मनीष कुमार थाने का सरकारी नंबर रिसीव नहीं करतें हैं तो ईश्वर ही जनता का रखवाला बनकर सामने आयेंगे। कोई बड़ी घटना पर क्षेत्र के जनता का कैसे फोन रिसीव करतें होंगे भगवानपुर थाना के थानाध्यक्ष।

